#85 भरोसा हो चला हे॥

ये रिश्तों मे तल्खी अब कुछ बढने सी लगी हे।
लगता हे उन्हे अब हमसे ज्यादा दुनिया की बातों पर भरोसा हो चला हे॥
-मयंक

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