#163 हाथ की लकीरों में।

कुछ बहुत ही अच्छा लिक्खा हॆ हमारी हाथ की इन लकीरों में।
हमे आज तक मोहब्बत नहीं हुई ये क्या आम बात हॆ॥
~मयंक

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