#266. उसके लबों के निशान आज भी हॆ॥

ऎसे चूमा उसने गाल को मानो
पत्थर पर गुलाब की पंखुड़ी छूई हो।
न हो यकीन तो आकर देख लेना
मेरे गाल पर उसके लबों के निशान
आज भी हॆ॥
~मयंक

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