#317. मै जब भी कलम पकड़ता हूँ।

मै जब भी कलम पकड़ता हूँ
तो कुछ लिख देता हूँ।
हाँ हे खुद पे गुरूर इतना …
की जब दिल से लिखता हूँ
तो महफ़िल रो देती हे।।
~mayank

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