#329. खून की सिहाई में डूबा खंज़र।

हम तो कलम से नही लिखते उसका नाम की कोई पढ़ ना ले।
और लोग तो खून की सिहाई में डूबा खंज़र से लिख देते है॥

#मयंक

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