#340. वाह रे आतंकी……..

जिस उमर में बच्चे को माँ शब्द का बोध नही, तुम उसे मज़हब का मतलब सिखा देते हो।
वाह रे आतंकी……..
जिसे कलम और कारतूस में अंतर नही पता तुम उसे जिहादी बना देते हो ॥

#मयंक

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