#344. वो दो पल ठहरे…

वो दो पल ठहरे…
मेरे साथ बेठे…
ढलती शाम हो….
मेरे दिल में क्या है वो पूछ बेठे…
थामें हम उसका हाथ…
और उससे कहे बेठें…
सदियां गुजारी हैं हमने….
यूं बंद कमरे में तन्हा बेठे-बेठे….
वो पूछें क्यों हो तन्हा…
क्या किसी बेवफा से मोहब्बत कर बेठे…
हम बोले- उसे बेवफा न कहो…..
वो शक्स तो सामने बैठा है जिससे हम मोहब्बत कर बेठे….
<3 #मयंक <3

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