#365. मेरी सोच, मेरी कलम॥

मेरी सोच।
मेरी कलम॥
मेरा साथी।
मेरा हमदम॥
तुझसे मोहब्बत।
तेरा भरम॥
मेरा दिल।
बिना ज़ख़्म॥
जिंदगी कोरा-कागज़।
भरेंगे हम॥
है मंजिल दूर।
तू बस बढ़ा कदम॥
मुस्कुराता चल।
ख़ुशी मिले या गम॥
फल की चिंता ना कर।
तू तो बस कर कर्म॥
-मयंक

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