#366. पिताजी के पेरों में टूटी चप्पल देखि ॥

मेरी फरमाइशों भरे मूह पर ताला लग गया।
जब मेने अपने पेरों में नए जूते,
और पिताजी के पेरों में टूटी चप्पल देखि ॥
-मयंक

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