#367. गरीब की कुटिया में पहला कदम रक्खा॥

उस शहज़ादी की मोहब्बत का रंग उसकी सूरत से उतारते देखा।
जब उसने मुझ गरीब की कुटिया में पहला कदम
रक्खा॥
©मयंक

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