#374. माला बनाने का हुनर…

ना मैं शायर हूँ, ना हूँ कवी,
ना मैं शायरी लिखता हूँ, ना कविता।
हाँ शब्दों को एक धागे में पिरोकर,
माला बनाने का हुनर बखूबी आता है॥

-मयंक

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