#375. SUICIDE NOTE : आखरी-पत्र…

ये निरंतर हार की जीत, की कहानी है।
मेने निरंतर कोशिश की,
पर मुझे हार मिली।
मैं उठा हर बार,
पर मुझे ठोकरे हज़ार मिली।
सफलता का कोई नामों-निशान नही।
पर हार की बौछार मिली।
लोगों ने उल्ल्हास उड़ाया मेरी हार का।
ना जाने क्या कारण था उनके इस व्यवहार का।
पहले हौसला टूटता था मिटटी की तरह,
टूटता था पर फिर बांध जाता था,
फिर एक मजबूत आकार में आ जाता था।
अब हौसला टूटा है एक पत्थर की भाँती,
मुझे मौत के अलावा कोई राह नज़र नहीं आती॥
नहीं मिला कभी जो वो था-
ख़ुशी,हंसी,
चैन,सुकून,
जीत का उत्साह,
मंजिल का जुनून।
हमेशा जो हाथ लगी वो थी-
हार, निराशा,
ठोकर, धिक्कार,
और बंद दरवाज़े॥
अकेला मैं,
और कमरे में गूंजती मेरी अवाज़े॥
अब मैं थक-हार चूका हूँ।
नाकामी को ही अपनी तकदीर मान चूका हूँ॥
अब नही बची हिम्मत और लड़ने की।
इस हार पर विजय करने की॥
अब मुझे कोई राह नज़र नही आ रही है।
मौत ही मेरी प्रिय सखी है, जो मुझे अपने पास बुला रही है॥
बड़े-बुजर्गों से सुना था-
की सब्र का फल मीठा होता है।
पर किसी ने ये नही बताया की जब सब्र का बंद टूटता है तो क्या होता है॥
सब ने दी बस सलाहें, किसी ने मदद का हाथ नही बढ़ाया।
मेरी हार पर सबने बढ़ाई दूरी, किसी ने मुझे नहीं अपनाया॥
मुझे माफ़ करना, मैं एक गलत कदम उठाने जा रहा हूँ।
मैं आज आत्म-दाह करने जा रहा हूँ॥
जीने की हर राह पर अब मुझे अवरोध मिल रहा है।
जीवन और मृत्यु में, मृत्यु मुझे निर्विरोध चुन रहा है॥
हार से टूटे मेरे कन्धों पर,
ये जीवन अब भारी है॥
मेरे सब्र का बाँध तो टूट चला है,
अब साँसों की बारी है॥
<3 मयंक <3

note- उपर लिक्खी बातों का मेरी असल जिंदगी से कोई ताल्लुक नहीं है, आप उपर लिखी कविता को मेरे साथ कृपया ना जोड़े |
आपका धन्यवाद…..

0 thoughts on “#375. SUICIDE NOTE : आखरी-पत्र…”

    1. us time kaafi kisse sune the suicide k, to socha ki log kitna nakaratmk soch skte h, jra me bhi to sochu…. ise likhne ke baad ghr pr ye khna pda ki esa post mene likkha h..
      kisi relative ki call aae to smjha dena..

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