#376. मोहब्बत और तकरार ।

मोहब्बत तो हम दोनों दिल-ओ-जान से करते है एक दुसरे से।
पर ये नोक-झोक अपना अक्सर असर दिखा देती है॥
ये छोटी-छोटी ग़लतफ़हमियाँ पानी की बूंदों की तरह होती है।
समुन्दर का रूप लेकर मोहब्बत की नीव हिला देती है॥
शक के दायरे में न कभी मैं आया न कभी वो आई।
ये नोक-झोक अक्सर शक का दायरा बढ़ा देती है॥
आदर का भाव होता है एक दुसरे के लिए मन्न में।
ये तल्खियाँ अक्सर अपशब्द बुलवा देती है॥
जिसके बगैर जी नही सकते एक पल भी।
ये तकरार उसे हमारा दुश्मन बना देती है॥
कहते है की जंहा दो बर्तन होंगे वंहा आवाज़ भी होगी।
पर ये तकरार के बाद की खामोशी अक्सर दिल दुखा देती है॥
होती है तकरार,
फिर गुस्सा निकलता है।
अपशब्द कहे जाते है,
आंसू आ जाते है॥
आक्रोश की आग बढ़ जाती है।
मोहब्बत का दरिया सूख जाता है॥
जिस साथी को चुना था जीवन भर के लिए।
अपने उसे फैसले पर प्रश्न चिन्ह उठ जाते है॥
पहले बड़ी-बड़ी बातों पर पत्ता तक नही हिलता था।
अब एक छोटी सी भूल पर तूफ़ान उठ जाता हैं॥
गुस्से से भरे स्वर जब वो सामने से कहते है।
हम भी पलटकर जवाब देने से भी नही कतराते है॥
पहले जिसकी नज़रों में डूब जाया करते थे।
अब उससे नजरे मिलाने में कतराते है॥
बोल-चाल बंद हो जाती है,
मोहब्बत सिर्फ नाम की रह जाती है।
उसके सामने से भी नही गुजरते,
मानो बिल्ली रास्ता काट जाती है॥
सोचते है गलत फैसला किया उसे अपने लिए चुनकर।
तब अच्छे पल नही, उसकी गलतियाँ हमारे मन्न में घर कर जाती है॥
दिन बीतता है,
रातें कटती है।
मनन हल्का होता है मोहब्बत बढती है,
गुस्सा ठंडा होता है॥
हम शांत हो जाते हैं।
मेने गुस्से में ये क्या कह दिया,
ये सोचकर पछताते है॥
सोचते है माफ़ी मांगे केसे,
उसके सामने जाने से भी कतराते है।
शर्मिंदगी का भाव लेकर,
फिर खुद ही मीठे बोल मुख से निकलते है॥
मोहब्बत का दरिया फिर भरता है,
फिर हम उसका हाल पूछ पाते है।
उसकी झूटी हंसी सच छुपाने की नादान कोशिश करती है,
पर उसकी पलकें सच दिखा देती है॥
दोनों को अपनी गलती का एहसास होता है,
मन्न से उतर जाता है वो जो गुस्से का लिबास होता है।
पछतावे भरे स्वर में माफ़ी मांगी जाती है,
एक दुसरे की बाहों में भरकर मोहब्बत का फिर मिलाप होता है॥
ग़लतफ़हमियाँ,
नादानियां,
तकरार,
तल्क्यियाँ,
ये तो जिंदगी की राह के पत्थर है।
इन्हें पार करना है उस साथी के साथ जो सबसे हटकर है॥
– <3 #मयंक✍ <3

0 thoughts on “#376. मोहब्बत और तकरार ।”

  1. आपने इस कविता में वो सब कह दिया हैं जो अक्सर होता है। यह सब वही बातें औए सच्चाइयाँ हैं जो हम मन में लिए फिरते हैं पर लिखते हुए या कहते हुए सही शब्दों का प्रयोग नहीं कर पाते। मुझे यह कविता बहुत ही ज़्यादा पसंद आई। ऐसा लग रहा हैं मानो जैसे मेरा मन यह सब बातें मुझसे कह रहा है।
    बहुत लाजवाब। आपकी सभी कवितायेँ बहुत ही बेहतरीन होती है। मैंने एक अपनी माँ को भी पढाई थी।
    लिखते रहिए।
    शुभ रात्रि।

    PS. I am your fan (यह हिंदी में नहीं आता। :P)

    1. .
      मैं जब भी लिखता हूँ, मैं उस situtation मैं डूब जाता हूँ, उसे खुद मेहसूस करता हूँ, और फिर कलम खुद चलती है, मुझे नही पता चलता है की मैं क्या लिख रहा हूँ ।
      अगर मैं शायरी या कविता को लिखने की कोशिश करू तो शायद सही शब्दों का इस्तेमाल नही हो सकता है, क्यूंकि तब आप उसमे कुछ ज्यादा ही लिख देते हैं, जो शायद असल जिंदगी में नही होता है।
      मैं नही जनता हूँ की मैं कैसा लिखता हूँ, पर जब आप लोगों की प्रतिक्रिया पढता हूँ- जेसे की आपने मेरी कोई कविता अपनी माता जी को पढाई , तो लगता है की मेरी कलम सही दिशा में बढ़ रही है।
      माता जी को मेरा प्रणाम कहिएगा।
      आपका शुक्रिया अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए 🙂
      और मेरा सौभाग्य की आपको मेरी कविता पसंद आती है ( कोई नही आपको इस लाइन की हिंदी नही आती है, मैं उसे English में समझ सकता हूँ 😛 )

      1. मैं आपकी इस बात से बिलकुल सहमत हु। मैं अभी सीख ही रही हु, हर बार लिखते समय यही कोशिश रहती है की लिखाये में सुधार आये। लेकिन मेरे साथ भी यही होता है की लिखते हुए बस सब्द अपने आप निकलते रहते हैं।
        हाँ, मेरी माँ को बहुत पसंद आई।
        और दरअसल मेरी हिंदी लिखने में गलत होजाती है कई बार, तो इसलिय इंग्लिश में लिख दिया 😛

      2. मैं आपकी इस बात से बिलकुल सहमत हु। मैं अभी सीख ही रही हु, हर बार लिखते समय यही कोशिश रहती है की लिखाये में सुधार आये। लेकिन मेरे साथ भी यही होता है की लिखते हुए बस सब्द अपने आप निकलते रहते हैं।
        हाँ, मेरी माँ को बहुत पसंद आई। 😀
        और दरअसल मेरी हिंदी लिखने में गलत होजाती है कई बार, तो इसलिय इंग्लिश में लिख दिया 😛

        1. he he he … हाँ हिंदी में गलती तो rply g me bhi dikh rhi hai,, मुझसे भी हो जाती है गलती,
          मेरा बस यही मानना है, हम शुरू से Perfect नही होते है, सीखते चलो,,आगे बढ़ना है, सीखते जाना है… 🙂

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