#379. एक दिन होगा जब मेरी कलम खामोश हो जाएगी।

एक दिन होगा जब मेरी कलम खामोश हो जाएगी।
तब भी मेरी रचना दुनिया में खुशबू फैलाएंगी॥
एक दिन आएगा जब में अपने नग्मे नही गुन-गुनाऊंगा।
तब दुनिया मेरी रचनाएँ गुन-गुनाएगी॥
एक दिन आएगा जब मेरी रचनाओं पर अल्पविराम लग जाएगा।
तब दुनिया मेरे पुराने नग्मे खंगालेगी॥
एक दिन आएगा जब लोगों की आँखें नम होंगी मेरे मुख्तक गुन-गुनाने पर।
उस दिन मेरी आत्मा सुकून पाएगी॥
एक दिन आएगा जब मेरे विरोधी भी याद करेंगे मुझे।
तब उन्हें मेरी बातें नहीं मेरी शायरी उन्हें मेरी याद दिलाएगी॥
एक दिन आएगा जब सिर्फ लोगों की स्मिर्तियों में रह जाऊंगा॥
तब भी मेरी रचनाएँ संसार में मेरा नाम करवाएंगी॥
– <3 ©मयंक <3

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