#391. जिनके घर में विभीषण रहते हों।

दूसरों के घर की दरारों से अन्दर झाँका नहीं करते।

दूसरों को कभी खुद से कम आँका नहीं करते॥

जिनके घर में विभीषण रहते हों।

वो कभी डींगे हांका नहीं करते॥

<3 मयंक <3

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