#392. एक #अज़ब खेल देखो #परदे का-

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कल तक वो #परदे में थे, जिनके लिए हमने ताउम्र #आंसू बहाए हैं।
आज हम #कफ़न में हैं, तो वो #बेपर्दा आए हैं॥

<3 मयंक <3

0 thoughts on “#392. एक #अज़ब खेल देखो #परदे का-”

  1. ये ऑंखें ही तो थी जिसे दीदार की तलब थी,रो रो कर किसी को पटाने की कोशिश तब थी ,परदा हटा चाँद बहार आया , लेकिन ऑंखें पूरी बंद अब थी ….

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