#404. तू हाथ फेर दे…

उलझा हूँ तेरे बालों की तरह।
तू हाथ फेर दे तो सुलझ जाऊं मैं॥
<3 ©मयंक <3

0 thoughts on “#404. तू हाथ फेर दे…”

    1. shiva जी।
      आप इस शायरी को 2 तरीके से देख सकते है।
      पहला- एक बेटा अपनी माँ से ये बात कह रहा है।
      दूसरा- एक प्रेमी अपनी प्रेमिका से ये बात कह रहा है।

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