#422. बचपन की अमीरी…

मेरे बचपन की अमीरी का आलम कुछ ऐसा था।

मैं टूटे पलक के बाल को फूंक मार हवा में उड़ा , सारा जहाँ खरीद लेता था॥

<3 ©मयंक <3

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