#428. चला जाऊंगा तेरे शहर को वीरान करके…

सुना है मेरे शहर छोड़ने की खबर से तू दुखी है,

तू सच आज भी न बता पाया, आज भी तेरी नज़रे झुकी है…

चला जाऊंगा तेरे शहर को वीरान करके,

तब देखता हूँ, मेरे बिन इस शहर में कौन सुखी है..
<3 ©मयंक <3

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