#437. सच्चे रिश्ते….

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सच्चे रिश्ते दिल ढून्ढ लेता है,
मुसाफिर अपनी मंजिल ढून्ढ लेता है।
तूफ़ान भटका देते है रास्ता कभी कभी,
पर बुलंद हौसले रखने वाला साहिल ढून्ढ लेता है॥
<3 ©मयंक <3

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