#443. एहम और वेहेम…

इन्सान तक नही रहता, ये एहम भी क्या चीज़ है।
रिश्तों की नीव भी हिला दे, ये वेहेम भी क्या चीज़ है॥
<3 ©मयंक <3

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Insaan tk nhi rehta, ye eham bhi kya cheez h,
Rishton ki neev bhi hila de, ye vehem bhi kya cheez h…

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