#450. एक कहानी, जो शुरू होते ही खत्म हो गई….

image

तेरी गली,.

तेरा मोहल्ला ।

तेरी गली के बच्चे,

आज भी याद है वो शोरगुल,
वो हल्ला ॥

मेरा तेरी गली में आना ।

तेरा खिड़की से झांकना,
मुझे देख अंदर चले जाना ॥

तेरा भाई,

जिसने मुझसे शिद्दत से दुश्मनी निभाई ॥

रोक कर वो मुझे पूछता –

”काम क्या है,

“बहुत आता है तू इधर, तेरा नाम क्या है,

तू मुझे जानता नही मैं कौन हूँ,

जिस मोहल्ले में तू खड़ा है,
मैं वंहा का डॉन हूँ.”॥

मैंने कहा-

“तू इतना क्यूँ इतराता है,।

चार फुट का है नही,
अकड़ किसे दिखाता है.”॥

नोक-झोंक हुई, फिर हल्ला हो गया,।

शोर सुन वहां इकठ्ठा मोहल्ला हो गया.॥

सबकी जुबां पर एक ही सवाल था…

“क्या हुआ, माज़रा क्या है,,

तुझे कभी देखा नहीं,
क्या तू इस मोहल्ले में नया है” ॥

मैं बोला-

“ना मैं नया हूँ, और ना इस गली का..

घूम रहा था, तो रुख किया इस गली का…”

उसका भाई बोला-

“इन जैसों को मैं खूब जानता हूँ,

ये गली में आते किस इरादे से है,

आज इसे मैं इसकी औकात बताता हूँ…”

फिर वंहा ज़ूबानी लड़ाई हो गई,।

अगले ही पल हाथापाई हो गई.॥

बीचबचाव हुआ, हमे अलग किया गया,।

एक दुसरे से माफ़ी मंगवाई गयी,
फिर दोनों को समझाया गया.॥

लोगों ने मामला सुलझाया,
जैसे पंचायत में सुनवाई हो गई,।

गली में फिर ना आने की चेतावनी दे,
मेरी वंहा से विदाई हो गई.॥

फिर मेरा उसकी गली में जाना बंद हो गया,।

ऐसे ही मेरी शुरू होती कहानी का अंत हो गया.॥
<3 ©मयंक <3

0 thoughts on “#450. एक कहानी, जो शुरू होते ही खत्म हो गई….”

  1. वाह! मज़ा आ गया. इन धक्केबाजी और चक्करों से ही तो जिंदगी बनती है. कहानी मोड़ लेती है, खत्म होने में तो वक्त है.

    1. धन्यवाद।
      वेसे ठोकरों से ही इंसान सीखता है,
      गिरता है सम्भलता है,
      उठकर फिर आगे अपने लक्ष्य की ओर बढ़ता है ;)े

  2. Hamesha dar dar ke karni pade vo chahat keisi,
    kabhi bin mange hi mil jati ho vo izazat keisi,
    kuch chize lad k aur chin k jitne mei hi maza hei yaaro,
    Jo aasani se hasil ho jati ho vo mohhabat keisi.!

  3. Hamesha dar dar ke karni pade vo chahat keisi,
    Jo kabhi bin mange hi mil jati ho vo izazat keisi,
    kuch chize lad k aur chin k hi jitne ka maza hei yaaro,
    Jo yu aasani se hasil ho jaye vo mohabbat keisi.!

Leave a Reply