#459. हवा का बदलता रुख. .

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परिस्थिति आपके अनुकूल हो फिर भी सतर्क रहिये।
क्यूंकि हवा हमेशा एक दिशा में नहीं बहती है॥
<3 ©मयंक <3
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0 thoughts on “#459. हवा का बदलता रुख. .”

  1. इसीलिए तो गुरुजन कह गए है कि ‘ जैसी चले बयार पीठ तब तैसी कीजे.’ हमेश संभव है या नहीं पता नहीं.

    2015-12-10 22:26 GMT-08:00 “Dil Ki Kitaab ( दिल की किताब )” :

    > Mayank Bhatt posted: ” परिस्थिति आपके अनुकूल हो फिर भी सतर्क रहिये। > क्यूंकि हवा हमेशा एक दिशा में नहीं बहती है॥ <3 ©मयंक __________________________________ Follow Dil Ki Kitaab on f.b — ( click > here to follow )”

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