#463. राजनीती में…

Rajneeti mein-
Yanha log apni-apni Galtiyan chupaate nazar aate hai,
Ek-dusre ko bas Aaina dikhate hai.

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राजनीती में-
यँहा लोग अपनी-अपनी गलतियाँ छुपाते नजर आते है।
एक-दुसरे को बस आईना दिखाते हैं॥


—————————————-

mयंक

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  4. साहब ये लोकतंत्र है।।

5 thoughts on “#463. राजनीती में…”

  1. अपने सही खा।
    वैश्या तो सिर्फ अपना जिस्म बेचती है, ये लोग तो अपना ज़मीर बेच देते है।

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