#464 Mohabbat ko mzaak bnakar rkkha h…

मोहब्बत को लोगों ने मज़ाक बनाकर रक्खा है,
भरोसे को राख बनाकर रक्खा है।
कैसे कह दूँ की सही साथी मिल गया है मुझे,
सच्ची मोहब्बत को लोगों ने इत्तेफ़ाक बनाकर रक्खा है॥

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Mohbbt ko logon ne mzaak bnakar rkkha h….
Bharose ko raakh bnakar rakkha h…..
Kese khu ki shi saathi mil gya h mujhe ..
Sacchi mohbbt ko logon ne ittefaq bnakar rkkha h…
<3 ©मयंक <3
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0 thoughts on “#464 Mohabbat ko mzaak bnakar rkkha h…”

      1. लिखते रहो शुक्रिया की कोई बात नही इंतजार रहता है आपकी हर एक पोस्ट का आपके ब्लॉग पर

          1. धन्यवाद लेकिन कमेंट्स से भी अच्छे आपके लेख और आपकी शायरी है जिनके हम कायल है
            अगर कमेंट्स करने से आप ऐसा करते है तो बहुत अच्छी बात है इससे आप और भी बढ़िया लिखेंगे

          2. जब तक किसी writer को feedback नही मिलता, उसे ये नही पता चलता की उसकी लेखनी में कितना सुधार हुआ है,
            खुद को बेहतर करने की कोशिस तो हर कोई करता है, पर जब कोई दूसरा उसकी कमी और अच्छाई बताता है, तो वो और सुधार कर पाता है।

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