फिर एक आत्महत्या….

शुरुआत कहा से करू पता नहीं,आज सुबह newspaper पर नज़र पड़ी, Headline थी – IIT MAINS EXAM clear करने के बवजूद suicide. (click here to read the full news).
उसकी उम्र सिर्फ 17 साल थी, क्या ये उम्र होती है ऐसा कदम उठाने की । उसके ऊपर कितने Mentally Pressure होगा की उसने ये कदम उठाया।
कुछ कहने की स्तिथि में नहीं हूँ, जब कोई खबर आपको अंदर तक झिंझोड़कर रख दे तब आप समझ नहीं पाते है की करें क्या ।
“मंज़िल को पाने के लिये मेहनत जरूरी है,
पर अक्सर जितनी मेहनत करो, फल भी उतना ही मिले जरुरी तो नहीं,
अपनी हार स्वीकार कर फिर लक्ष्य की ओर निरंतर बढ़ते रहिये,
गिरना सम्भलना और आगे बढ़ना, यही तरीका है अपने लक्ष्य को हासिल करने का,
पर अपनी हार को स्वीकार न कर पाना अक्सर लोगों को गलत कदम उठने पर मजबूर कर देता है “
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“एक छोटी सी चींटी जब चीनी के दाने को खींचने की कोशिश करती है, तब जरुरी नहीं की वो खींच ही लेगी ।
उसे ये पता चलता है की उसे और मेहनत करनी है,
और मेहनत करने पर वो उस दाने को थोड़ा हिला पाती है,
उसे ये एहसास हो जाता है की वो उस दाने खींचकर लेजा सकती है,
और फिर वो पुनः कोशिश करती है और कमियाब हो जाती है । “

लक्ष्य बड़ा हो सकता है पर अगर हिम्म्त उससे बड़ी है, तो आपके और आपकी मंज़िल के बीच में कोई नहीं आएगा ।
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मेरी एक विनती है आप सबसे-
“अपने बच्चों पर पढ़ाई का इतना Pressure मत डालिए की वो कोई गलत कदम उठा ले “
जिनमे काबिलियत होती है, वो कभी किसी कागज के टुकड़े (Degree) के मोहताज़ नहीं होते ।
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Suicide Note(Suicide Note ( आखरी पत्र ) पर एक पोस्ट मेने भी लिखा था, आज दुःख होता है की क्यों लिखा था ।

<3 mayank <3

0 thoughts on “फिर एक आत्महत्या….”

  1. Ekdum sahi likha aapne. Why are so many students are taking such a strong step to attempt suicide. The root cause of this needs to be understood. Is it the parental pressure or the competition that they are unable to handle.

  2. sunte hi aa rhe hain ki mjb father ke joote jb son ke paav me aane lge to usko apna dost smjhna chaahiye. or aaj to globlization ka jmaana hai. aaj ke parent us field ko or acche se jaante hain, smjhte hain, or apne children se utna pyaar bhi krte hain. tb kun ye smsyaa aa rhi hai? it shows that…. picture abhi baaki hai.

    1. Hum chahte h ki hmara beta kamiyaab ho, hamse kaafi aage nikle, par aksar is chahat ka bura asar bhi baccho pr pad jaata h, hm unse hadd se jyada ummiden baand lete h, or unpr anjaane me kaafi dbaaw bna dete h, jise vo jhel nhi paate h..
      Pita ki jagah ek dost bankar agar hm uske mann me kya h ye janne ki kosis kre to shayad kuch badal jaae.

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