#503. दूसरे के घाव…

Aaj-Kal Zaamana kuch badal sa gya hai,
Dusre ke ghaaw ko dekh insaan ko sukoon milne lga hai,

आज-कल ज़माना कुछ बदल सा गया है,
दूसरे के घाव को देख इंसान को सुकून मिलने लगा है ।

<3 mयंक <3

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