मेहनत का फल…..

657 दिन की मेहनत कुछ रंग लाई है,
Google पर ” दिल की किताब ” Top पर आई है…
<3 मयंक <3
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23/Oct/2014 की रात को जब 2 दोस्तों से मिला तो इसे ही बात चलने लगी उन मुद्दों पर जिनके कभी ना सर होते हैं ना पाँव| himanshu बोला यार तू काफी अच्छा लिखता है, कितना कम लेता है इससे, मेरी हंसी छूट गई|
मैंनेकहा भाई मैं सिर्फ शौक के लिए लिखता हूँ…
तभी Abhishek बोला की यार blogging किया कर f.b पे पोस्ट करता ही है, एक blog बना ले ओर उसपर भी post करना.
24/Oct की रात सोचा की चलो शुरू करे, पर सोचा ना था की ये मुकाम हासिल होगा,  फिर एक दिन ये मुकाम हासिल हुआ Top 15 Socially Active Poetry Blogs in India  (click here to see )में मेरा नाम भी शामिल हुआ…
वो पल भी कुछ ख़ास था, पर सबसे ख़ास था आप सबसे जुड़ना, मेरे कई नए दोस्त बने.. जिनसे मैंने काफी कुछ सीखा, मेरी कमियाँ मुझे पता चली  और आप सबका प्रोत्साहन जितना भी मिला उसीने मुझे हमेशा पहले से अच्छा लिखने में मदद की,
कुछ लोग मुझे शायर कहते है, मैं कोई शायर नही हूँ न कोई कवी हूँ,(click here to read)
जब किसी लक्ष्य की ओर बिन लोभ के बढ़ो तब मंजिल पाने की बात ही कुछ ओर होती है, क्यूंकि हारने का गम नही होता है….
“निकल पड़िये किसी अनजान राह पर,
हार भी मिलेगी तो क्या हुआ,
कुछ नया सीखने को तो मिलेगा”
आज भी काफी ख़ुशी है इस बात की, की एक लक्ष्य हासिल कर लिया है, पर कभी मत सोचिये की लक्ष्य मिल गया तो ठहर जाते है,
“बहते पानी से कभी बास नही आती,
और कुछ लोगों को बिन मजिल से जिंदगी रास नही आती”
अंत में बस इतना ही कहना है, की आप सब का शुक्रिया मेरे दोस्त बनने के लिए मेरा गुरु बनने के लिए, मुझे टोकने के लिए मुझे सीख देने के लिए, मेरा प्रोत्साहन करने के लिए मेरा साथ देने के लिए……
<3 मयंक <3


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