#520.   शायरी मेरी, आवाज़ तेरी…


मेरे हर्फ़ जो तेरे लबों से निकले।
उन्हें जन्नत मिल गई, तेरे लबों पर आकर।

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Mere Harf jo tere Labon se nikle.

Unhe Jannat mil gai, tere Labon par aakar…

💝 मयंक 💝

 हर्फ़ = शब्द

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