#521.  जुदाई का गम…


​इतना आसां नही उसको भुला देना।

जो करीब आया हो,

जिसने दिल को धड़काया हो,

नींद चुराई हो,

मुझे तड़पाया हो।

जुबां से कह दिया की भुला बैठे है,

अपने ज़ख्म कैसे दिखायें, जो दिल में दबाये बैठे हैं।।

इन ज़ख्मों को नासूर हर कोई बनाना चाहता है,

मेरे पास आकर, मुझसे उसका हाल पूछ जाता है।।

बहुत कोशिश की है रातों में सोने की,

सबके सामने रोने की,

पर कामियाबी इतनी आसानी से हाथ कंहा लगती है,

अब तो हर शाम तेरी याद के साथ कटती है।।

पलकों से खामोश हूँ,

पर दिल बहुत रोता है,

कल तक दूसरों को दिलासा देते थे,

पर आज पता चला जुदाई का गम क्या होता है।।

💝मयंक💝

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