#538. मेरे शब्द ज़हर तो नहीं…? (Mere Shabd zehar to nhi)


मैं किसी की सलाह का मोहताज़ नहीं।

जो किसी का घर जला दे,

वैसे नफरत भरे मेरे अलफ़ाज़ नहीं।।

💝 ©mयंक💝

2 thoughts on “#538. मेरे शब्द ज़हर तो नहीं…? (Mere Shabd zehar to nhi)”

Leave a Reply