#545 मेरे कपड़े छोटे या तेरी सोच…

​शायद इस सीख की हर उस मर्द को जरूरत है जो औरत को अपने पैरों की जूती समझता है। उनकी सोच को बदलना तो शायद मुमकिन नही है क्योंकि उनके दिल के आईने पर अहम की धूल जमी है जो इतनी आसानी से हट नहीं सकती है। पर अपना प्रयास जारी रखना है शायद किसी के आईने  धूल हटा सकूँ।।

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Mujhe na sikha ki kaise Kapde pehnu,

Tu apni nigaahon ko Aachran ka Hijab pehna..

मुझे न सिखा की कैसे कपड़े पहनू,

तू अपनी निगाहों को आचरण का हिज़ाब पहना ।।

💝 mयंक

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