#551 एक कहानी जी कभी शुरू ही न हुई…. (Ek kahani jo kabhi shuru hi na hui…)

एक किस्सा,

छिपा दिल में,

होंठ सिये,

आँखों में ज़ज़्बात लिए,

खड़ा सामने उसके।

बर्फ ज़ुबाँ पे,

ख़ामोशी फ़िज़ा में।।

“कुछ कहानियों की उम्र बस इतनी सी होती है”

💝mयंक

Leave a Reply