#555. वक़्त की रेत… ( Waqt ki Ret..)

वक़्त-वक़्त की बात है,

जब बीत जाता है वक़्त तब बड़ा याद आता है।

और जब वक़्त होता है, तब उसकी क़द्र नी होती है।।

<3 mयंक

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