#558. दिल के अरमान तब टूटे…

दिल में बस एक ख्याल था,

वो पलटे,

मेरी ओर बढ़े,

मेरा हाथ थामें,

और कहे,

क्यों न दो से एक हो जाये,

दुनियादारी भूल आ गले लग जाए।।

पानी जैसे शांत मन्न में भूचाल सा आजाता,

गर उसकी ज़ुबाँ पर मेरा नाम आता।।

वो पलटी ज़रूर,

वो मेरी ओर बढ़ी,

मेरी धड़कने बढ़ी,

जब उसकी निगाह मुझसे लड़ी।

पर उस दिन एहसास हुआ,

की किसी अंजान पे दिल मत लगाना।

मेरे दिल के अरमान तब टूटे,

जब उसने कहा “भैया” ज़रा ये पता बताना।।

😂mयंक

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हर कहानी का अंत मोहब्बत भरा नहीं होता , कभी कभी मज़ाकिया भी होता है😁😁😁😁😁

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