#354. पलकें ख़ुशी और गम में भीगी थीं।।

Click Here to read Full Story : #354. पलकें ख़ुशी और गम में भीगी थीं।।

 

 

3 thoughts on “#354. पलकें ख़ुशी और गम में भीगी थीं।।”

Leave a Reply