दिल की किताब का पहला पन्ना आज जुड़ा था…

कुछ यूं ही 3 साल पहले ये कारवां शुरू हुआ था, जब एक दोस्त ने कहा की यार तू अच्छा लिखता है ( वैसे सच ये है की मैं कैसा लिखता हूँ वो तो मुझे आज भी नही पता है, वो तो आप ही जानते हो) एक blog बना ले, काफी कमाई हो जाएगी तेरी, 

कमाई..??

दिमाग में जो सबसे पहली बात आई थी वो ये थी कि मेरी लिखी सारी शायरी safe हो जाएगी और एक जगह में उन्हें इकट्ठा कर सकूँगा।

3 साल में कामियाबी कुछ ज्यादा खास तो नहीं पर इस दिल की किताब को Google के first page पे पहुँचाया है।

कुछ खुशी के पल और भी आए जो आप सब के साथ शेयर किए हैं मेने पहले भी।

पर सच ये है कि आपको पसंद आया इसलिए मैंने और लिखने की कोशिश की, आपकी हौसलाअफजाई का बहुत बड़ा हाथ है मेरी कलम के चलते रहने के पीछे, बस आप सब का सपोर्ट चाहिए, और मैं ऐसे ही लिखता रहूँगा।

©mयंक

2 thoughts on “दिल की किताब का पहला पन्ना आज जुड़ा था…”

Leave a Reply